हरियाणा में 1 अक्टूबर से पुरानी गाड़ियों और ट्रैक्टरों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल? जानिए पूरा सच और किसानों की चिंता
हरियाणा के एनसीआर जिलों में 1 अक्टूबर 2026 से एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार ने घोषणा की है कि 10 साल से पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों को पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं दिया जाएगा। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। कई लोग कह रहे हैं कि यह फैसला किसानों और आम मध्यमवर्गीय परिवारों पर बोझ डालने वाला है, जबकि बड़े उद्योगों पर कोई सख्ती नहीं दिख रही।आखिर क्या है नया नियम?हरियाणा सरकार वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के तहत यह कदम उठा रही है। पहले चरण में गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर के पेट्रोल पंपों पर ANPR कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट पढ़कर तुरंत बता देंगे कि वाहन कितना पुराना है। अगर वाहन तय उम्र पार कर चुका है तो पंप वाला ईंधन नहीं देगा।सरकार का कहना है कि इससे एनसीआर में प्रदूषण कम होगा। दिल्ली में पहले से ऐसा नियम लागू है। हरियाणा में पहले चरण में 775 कैमरे लगाए जाएंगे, जिनकी लागत करीब 41.74 करोड़ रुपये है।किसानों और आम लोगों की चिंता क्या है?बहुत से किसान परिवारों के पास पुराने ट्रैक्टर हैं जो उनके पिता या दादा ने खरीदे थे। ये ट्रैक्टर अभी भी खेतों में काम आते हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या कृषि ट्रैक्टर भी इस नियम के दायरे में आएंगे? सरकारी बयानों में मुख्य रूप से कारों और सामान्य वाहनों की बात हो रही है, लेकिन स्पष्ट जानकारी अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है। इसी वजह से अनिश्चितता बनी हुई है।मध्यमवर्गीय परिवार भी चिंतित हैं। कई लोगों की पुरानी कारें अच्छी हालत में हैं और वे उन्हें चलाना चाहते हैं। नया वाहन खरीदना सबके लिए आसान नहीं है।दूसरी तरफ सवाल भी उठ रहे हैंलोग कह रहे हैं कि कारखाने साल भर धुआं छोड़ते हैं और गंदा पानी नदियों में डालते हैं, लेकिन उन पर इतनी सख्ती नहीं दिखती। पुरानी गाड़ियों को निशाना बनाना आसान लगता है, जबकि बड़े प्रदूषण के स्रोत पर कार्रवाई कम नजर आती है। यह सवाल जायज है और सरकार को इस पर भी ध्यान देना चाहिए।क्या करें वाहन मालिक?अगर आपकी गाड़ी या ट्रैक्टर इस श्रेणी में आता है तो समय रहते जांच कर लें। वाहन की उम्र VAHAN पोर्टल पर देखी जा सकती है। कुछ लोग वाहन को एनसीआर के बाहर के जिलों में शिफ्ट करने का विकल्प भी देख रहे हैं।प्रदूषण नियंत्रण जरूरी है, लेकिन नीति बनाते समय किसानों और आम नागरिकों की वास्तविक स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि कृषि ट्रैक्टर इस नियम में शामिल हैं या नहीं।आप इस फैसले के बारे में क्या सोचते हैं? क्या यह सही दिशा में कदम है या आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।

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